Lpg Gas Cylinder Update : एलपीजी गैस सिलेंडर हुआ बेहद सस्ता, जानिए आज के ताजा भाव।

अगर आपके घर में भी गैस सिलेंडर से चूल्हा जलता है, तो आज की यह खबर सीधे आपके महीने के खर्चे से जुड़ी है। बढ़ती महंगाई के इस दौर में गैस के दामों का ऊपर-नीचे होना परिवार के बजट की धुरी हिला देता है। फरवरी 2026 का अपडेट लेकर आया है, और इसमें कुछ लोगों के लिए राहत की बात है तो कुछ के लिए नई चिंता। आइए, बिना किसी पॉइंट के आपको सीधी बात बताते हैं।

घरेलू उपभोक्ताओं के लिए स्थिर दामों की राहत

घरेलू उपभोक्ताओं के लिए इस बार खबर अच्छी है। 14.2 किलो वाले सिलेंडर की कीमतों को स्थिर रखा गया है। मसलन, जयपुर में यह लगभग 856 रुपये और मुंबई में 852 रुपये के आसपास ही बना हुआ है। यह स्थिरता उन लाखों परिवारों के लिए एक सुकून की सांस है, जो हर महीने बढ़ते दामों से परेशान रहते थे। मेरे एक पड़ोसी ने तो कहा कि पिछले कुछ महीनों से रसोई का बजट बिगड़ा हुआ था, इस स्थिरता से उन्हें थोड़ी राहत मिलेगी।

कारोबारियों पर भारी पड़ा कमर्शियल सिलेंडर का महंगा होना

लेकिन हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। जहां घरेलू ग्राहकों को राहत मिली, वहीं छोटे कारोबारियों पर मुसीबत आन पड़ी है। होटल, ढाबे और छोटे रेस्टोरेंट चलाने वालों के लिए 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत लगभग 49 रुपये बढ़ा दी गई है। जयपुर में अब यह सिलेंडर 1,623 रुपये के पार पहुंच गया है। सोचिए, जिस दौर में लोग बाहर खाने पर भी पैसे बचा रहे हैं, उस समय रेस्टोरेंट वालों पर यह बोझ और बढ़ना चिंता की बात है।

उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए सब्सिडी बनी राहत

एक बड़ी राहत उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए बनी हुई है। गरीब और ग्रामीण परिवारों को अभी भी हर सिलेंडर पर 200 रुपये की सब्सिडी मिल रही है हालांकि यह साल में 12 सिलेंडरों तक ही सीमित है। यह सहायता उनके लिए वरदान से कम नहीं है। पर सवाल यह उठता है कि क्या यह सब्सिडी आने वाले समय में भी बरकरार रहेगी क्योंकि अक्सर देखा गया है कि कच्चे तेल के दाम बढ़ने पर सब्सिडी का दायरा सिकुड़ने लगता है।

हर शहर में अलग कीमत का क्या है राज

असल में, हर शहर में गैस के दाम अलग-अलग होने की वजह वहां के स्थानीय टैक्स और परिवहन खर्च होते हैं। इसलिए दिल्ली, कोलकाता और चेन्नई की कीमतों में थोड़ा-बहुत फर्क दिखाई देता है। सरकारी कंपनियां हर महीने इन दामों की समीक्षा करती हैं, और आम आदमी की नजर हमेशा इसी बात पर टिकी रहती है कि अगली बार का फैसला उसके पक्ष में आएगा या नहीं।

आगे क्या रहेगा राहत का सिलसिला

कुल मिलाकर फरवरी का यह अपडेट मध्यमवर्गीय घरों के लिए थोड़ी राहत लेकर आया है। लेकिन कमर्शियल उपयोगकर्ताओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मेरे हिसाब से आने वाले महीनों में वैश्विक बाजार की स्थिति पर नजर रखना जरूरी होगा। क्योंकि रसोई का बजट सिर्फ एक संख्या नहीं बल्कि परिवार के पूरे महीने के खाने-पीने का हिसाब-किताब है। क्या आपको नहीं लगता कि ऐसे समय में ऊर्जा के वैकल्पिक साधानों पर भी गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।

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